सोलर पम्प स्थापना के नियम, शर्ते एवं दिशा-निर्देश

  • सोलर पंप के आवेदन हेतु निम्नलिखित नियम, शर्ते एवं दिशा-निर्देश का पालन होना अनिवार्य है


  • सामान्‍य जानकारी

  • 1. योजना में आवेदन कैसे करें, इसकी जानकारी के लिए वेबसाईट cmsolarpump.mp.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।
  • 2. योजनांतर्गत आवेदन कृषि भूमि की सिंचाई के लिए है। सोलर ऊर्जा आधारित जल पम्पिंग संयंत्र का उपयोग विहित कार्य (कृषि भूमि की सिंचाई) हेतु ही किया जायेगा।
  • 3. सोलर पंप की उपयोगिता उपरांत, सोलर पैनलों की उत्‍पादित ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग हेतु नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश तकनीकी मापदण्‍ड एवं मानको के अनुसार यूनिवर्सल सोलर पंप कन्‍ट्रोलर (यू.एस.पी.सी.) के उपयोग का विकल्‍प कृषकों को दिया जायेगा। इन पंपों के लिए बिना यू.एस.पी.सी. के समान क्षमता के सोलर पंप का अनुदान ही केन्‍द्रांश व राज्‍यांश के रूप में लागू होगा।
  • 4. योजना के अंतर्गत 5 एच.पी. क्षमता तक केवल डी.सी. तथा बडे पंपों की श्रेणी में ए.सी./डी.सी. दोनों तरह के पंप लगाये जायेंगे।
  • 5. सोलर पंप की लागत का लगभग 10 प्रतिशत कृषक द्वारा Margin Money के रूप में दिया जायेगा।
  • 6. पम्प की लागत के 60 % के बराबर के भाग की प्रतिपूर्ति कृषक ऋण के माध्‍यम से होगी जिसके भुगतान का पूरा दायित्‍व राज्‍य शासन का होगा।
  • 7. योजना के प्रथम चरण में गत वर्षों में पंजीक्रत कृषकों को प्रश्नाधीन भूमि (सिंचाई हेतु प्रस्‍तावित खसरे) पर, अस्‍थायी विद्युत संयोजन वाले कृषकों व अविद्युतिकृत कृषकों को सोलर पंप का लाभ दिया जावेगा।
  • 8. वर्तमान में नवीन आवेदन हेतु वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के अस्थाई विद्युत कनेक्शन धारी कृषकों को सोलर पंप प्रदाय किया जाना प्रावधानित है। योजनांतर्गत विद्युत वितरण कंपनीयों द्वारा स्‍वीकृत अस्‍थाई विद्युत कनेक्‍शन में से मात्र 3 व 5 एचपी क्षमता से एक अधिक क्षमता यथा 5 व 7.5 एचपी क्षमता का सोलर पंप चयन करने हेतु विकल्‍प पोर्टल पर उपलब्‍ध होगा । इसके अतिरिक्‍त, अन्‍य क्षमता हेतु एक अधिक क्षमता का विकल्‍प उपलब्‍ध नही होगा ।
  • 9. सोलर पम्प संयंत्र की स्‍थापना के लिये आवेदक कृषक के पास, सिंचाई का स्थाई स्त्रोत होना चाहिए एवं सोलर पम्प हेतु वांछित जल संग्रहण ढाँचे की आवश्यकता अनुसार व्यवस्था होना चा‍हिए।
  • 10. स्‍थापित सोलर पम्‍प संयंत्र का विक्रय या हस्तांतरण नहीं किया जा सकता है।

  • आवेदन/पंजीयन संबंधी जानकारी

  • 1.सोलर पंप क्षमतावार/श्रेणीवार निर्धारित राशि ‘‘मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, भोपाल’’ के पक्ष में ऑनलाईन भुगतान के साथ, अधिकृत पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन प्राप्त होना अनिवार्य है।
  • 2.उपरोक्‍तानुसार सफल आवेदन उपरांत चयनित इकाई द्वारा स्‍थापना स्‍थल का भौतिक सत्‍यापन कर लिया जाने पर चयन की सूचना म.प्र. ऊर्जा विकास निगम लि. द्वारा दी जायेगी।
  • 3.इसके उपरांत कृषक ऋण हेतु, हितग्राही कृषक द्वारा पोर्टल पर दर्शित बैंक का चयन करना होगा एवं पोर्टल पर यह सूचना दर्शित होने पर - “Please apply in Agriculture Infrastructure Fund (AIF) portal, select the “Name of the bank”, AIF (कृषि अवसंरचना निधि) अंतर्गत आवेदन हेतु पोर्टल पर उक्‍त बैंक का ही चयन करना होगा। तत्‍पश्‍चात ही संयंत्र स्‍थापित करने की कार्यवाही की जायेगी।
  • 4.चयनित हितग्राही कृषक द्वारा समय-सीमा में निर्धारित राशि जमा न करने पर अन्‍य (अगले) आवेदक/हितग्राही कृषक का चयन कर लिया जायेगा। बाद में, उक्‍त हितग्राही कृषक द्वारा राशि जमा कराये जाने की स्थिति में, उनके आवेदन को, आवंटन (फंड एवं लक्ष्‍य) की उपलब्‍धता अनुसार, स्‍वीकृति किया जा सकेगा।

  • स्‍थापना एवं रख-रखाव संबंधी जानकारी

  • 1. सोलर पम्प संयंत्र की स्‍थापना केन्‍द्र सरकार व राज्‍य सरकार द्वारा निर्धारित निर्देशानुसार/मापदण्ड अनुसार की जायेगी।
  • 2. सोलर प्लेटों की स्थापना हेतु छाया रहित स्थान उपलब्ध कराने की पूर्ण जिम्मेदारी हितग्राही कृषक की होगी।
  • 3. आवेदन भरने एवं राशि जमा कराये जाने के बाद पंप स्‍थापना हेतु स्‍थापना स्‍थल तकनीकी रूप से उपयुक्‍त (Feasible) पाये जाने पर ही सोलर पंप की स्‍थापना की जावेगी। सोलर पम्प स्थल उपयुक्त/चयन न होने पर राशी निगम द्वारा आवेदक को वापिस की जायेगी। इस पर कोई ब्‍याज का भुगतान देय नहीं होगा।
  • 4. केन्‍द्र व राज्‍य शासन से योजना हेतु राशि प्राप्त होने पर, हितग्राही कृषक से सम्‍पूर्ण हितग्राही अंश की राशि प्राप्‍त होने के पश्‍चात लगभग 120 दिवस में सोलर पम्पों की स्थापना का कार्य पूर्ण किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में समयावधि बढ़ाई जा सकती है। स्थापना का कार्य पूर्ण करने में देरी होने पर म.प्र. ऊर्जा विकास निगम का किसी भी प्रकार का कोई भी दायित्व, जिम्मेदारी नहीं होगी और न ही आवेदक कृषक को इस हेतु कोई क्षतिपूर्ति की जायेगी।
  • 5. सोलर पम्प की स्थापना एवं संतोषप्रद प्रदर्शन/संचालन उपरांत समस्त संयंत्र हितग्राही कृषक को सौंप दिया जाएगा।
  • 6. स्‍थापित सोलर पम्‍प संयंत्र की सुरक्षा एवं सामान्य रख-रखाव की जिम्‍मेदारी हितग्राही कृषक की होगी।
  • 7. सोलर प्लेटों की समय-समय पर सफाई करते रहने की जिम्‍मेदारी हितग्राही कृषक की रहेगी।
  • 8. सोलर पम्‍प स्‍थापित होने के पश्‍चात, पम्‍प की आवश्‍यकता/उपयोग न होने पर, हितग्राही कृषक द्वारा पैनलों को जमीन के समानान्‍तर रखा जाना होगा, जिससे आंधी, तूफान इत्‍यादि से संयंत्र को नुकसान न पहुँचे।
  • 9. सोलर पम्प स्थापना के उपरांत, संयंत्र की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी या टूट-फूट की जिम्मेदारी हितग्राही कृषक की होगी (तकनीकी खराबी को छोड़कर)। किसी प्राकृतिक आपदा के कारण क्षतिग्रस्‍त होने की स्थिति में हितग्राही कृषक इसकी जानकारी संबंधित इकाई एव जिला कार्यालय को शीघ्रअतिशीघ्र देगा। /चोरी होने की स्थिति में, हितग्राही कृषक द्वारा, शीघ्रअतिशीघ्र पुलिस में एफ.आई.आर. करनी होगी तथा स्‍थापनाकर्ता इकाई एवं जिला कार्यालय को भी तत्‍काल सूचित करना होगा, ताकि स्‍थापनाकर्ता इकाई Insurance Claim हेतु आवश्‍यक कार्यवाही कर सके। Insurance Company द्वारा मान्‍य होने पर ही टूट-फूट/ चोरी या क्षतिग्रस्‍त हेतु संयंत्र में सुधार कार्य किया जाना मान्‍य होगा।
  • 10.सोलर पम्‍प स्‍थापना के उपरांत संयंत्र से किसी भी प्रकार की छेड-छाड (कन्‍ट्रोलर को अथवा मोटर पम्‍प सेट को सीधे ए.सी. पॉवर सप्‍लाई से चलाने का प्रयास, संयंत्र की वायरिंग से छेडछाड आदि।) की अवस्‍था में खराब हुए अवयवों (Components) को ठीक करने/बदलने/संयंत्र का सुधार करने की जिम्‍मेदारी म.प्र. ऊर्जा विकास निगम लि. तथा ठेकेदार इकाई की नहीं होगी। ऐसी अवस्‍था में संबंधित ठेकेदार इकाई से संयंत्र को पूर्णत: ठीक कराने, खराब हुए अवयव (Components) को बदलवाने का पूरा व्‍यय हितग्राही को वहन करना होगा।
  • 11.स्थापित सोलर पम्प की 5 वर्ष की रख-रखाव की अवधि में पंप को अन्‍यत्र स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा अन्‍यथा पंप वारंटी की शर्त से बाहर हो जायेगा।

  • अन्‍य निर्देश/जानकारी

  • 1. आवेदन-पत्र में सोलर पम्पिंग सिस्टम के प्रकार के अनुरूप दी गई डिस्चार्ज की जानकारी स्टेण्डर्ड टेस्टिंग कंडीशन्‍स के अनुरूप है। स्थापना स्थल पर सोलर ऊर्जा (Solar Radiation) की उपलब्धता तथा कंडीशन्‍स के अनुरूप डिस्चार्ज कम या ज्यादा हो सकता है।
  • 2. यदि सोलर पम्प स्थापना के उपरांत हितग्राही कृषक का रजिस्‍टर्ड मोबाईल नम्बर परिवर्तित होता है तो, हितग्राही कृषक द्वारा इसकी जानकारी/सूचना मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के जिला कार्यालय एवं स्थापित करने वाली इकाई को दी जानी होगी।
  • 3. स्‍थापना के पश्‍चात् बोर कोलेप्‍स होने/ वॉटर लेवल कम हो जाने की स्थिति में उसी खेत पर अन्‍यत्र स्‍थान पर, जहाँ पम्‍प के लिये समुचित वॉटर सोर्स उपलब्‍ध है, हितग्राही कृषक के व्‍यय पर सोलर पम्‍प संयंत्र स्‍थानांतरित किया जा सकेगा।
  • 4. हितग्राही कृषकों द्वारा आवश्यकता पड़ने पर मुख्य रोड से साईट (जहाँ पर सोलर पम्प की स्थापना की जानी है) तक के ट्रान्सपोर्टेशन व स्थापना में सहयोग दिया जाना अपेक्षित है।
  • 5. योग्य जल स्‍त्रोत जैसे- कुँआ, बोर आदि प्रदान करने का दायित्व तथा उक्‍त स्‍त्रोत से जल की उपलब्‍धता का दायित्‍व हितग्राही कृषक का रहेगा। किसी भी परिस्थिति में बोर के क्षतिग्रस्त होने, कोलेप्स होने अथवा वॉटर लेवल नीचे चले जाने स्थिति में या बोर से सम्बन्धित अन्य कारणों से पम्प संचालन में व्यव्धान होने पर, प्रदायकर्ता इकाई का कोई दायित्व निर्धारित नहीं होगा। बोर कोलेप्स होने की स्थिति में मोटर एवं पम्प निकालने की पूर्णतः जवाबदारी हितग्राही कृषक की होगी।
  • 6. सोलर पम्‍प स्‍थापना के पश्‍चात किसी प्रकार का स्‍थल परिवर्तन अथवा मीटर हेड परिवर्तन मान्‍य नहीं होगा।
  • 7. ऋतु परिवर्तन के अनुसार, हितग्राही कृषक द्वारा, सोलर पैनलों की दिशा एवं कोण को दिशानुसार परिवर्तित करते रहना होगा, जिससे संयंत्र से अधिकतम डिस्‍चार्ज प्राप्‍त हो सके।
  • 8. स्‍थापित सोलर पम्‍प की फाउन्‍डेशन के आस-पास स्‍वयं हितग्राही कृषक द्वारा मिट्टी इत्‍यादि डालते रहना होगा ताकि संयंत्र के पास पानी एकत्र न हो और फाउन्‍डेशन की मजबूती बनी रहे।
  • 9. पम्‍प स्‍थापना के उपरांत स्‍थापनाकर्ता इकाई से उनके कम्‍पनी का मुख्‍यालय का दूरभाष नम्‍बर, प्रदेश स्‍तर का सर्विस सेन्‍टर का दूरभाष नम्‍बर एवं जिला स्‍तर के प्रतिनिधि का दूरभाष नम्‍बर अवश्‍य प्राप्‍त करें।
  • 10. अपने स्‍तर पर किसी अन्‍य माध्‍यम से सोलर पम्‍प संयंत्र की मरम्‍मत अथवा किसी अवयव के बदलने की स्थिति में संयंत्र की वारंटी स्‍वत: समाप्‍त मानी जायेगी।
  • 11. किसी भी विवाद की स्थिति में केवल भोपाल न्यायालय का ही क्षेत्राधिकार होगा।