हमारे बारे में

वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण की बढती मांग के दृष्टिगत नवीन एवम नवकरणीय ऊर्जा का रोल अहम हो गया है। भारत में नवकरनीय ऊर्जा प्रचुरतासे उपलब्ध है तथा नवकरणीय ऊर्जा उत्पाद व प्रणालियों के उपयोग का विश्व का सबसे बडा कार्यक्रम लागू है । 30 जून 2012 को भारत में कुल विद्द्युत उत्पादन क्षमता 2,05,340.26 मेगावाट आंकी गयी , जिसमें नवकरणीय ऊर्जा अंश भागीदारी 12% अनुसार 24,832.68 मेगावाट है । प्रदाय की जाने वाली विद्युत क्षमता में वृद्धि के बाद भी हमारे पॉवर सिस्टम अब भी विद्युत की कमी तथा क्वालिटी समस्या से ग्रस्त हैं । स्वच्छ , विश्वसनीय, सुरक्षित व प्रतिस्पर्धी ऊर्जा के उपयोग हेतु नवकरणीय ऊर्जा साधनों व उपायों के उपयोग की अत्याधिक आवश्यकता है । केंद्र व राज्य सरकारो व्दारा नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढावा देने के उद्देश्य से अनेक प्रकार की अनुकूल नीतियॉ व प्रोत्साहन लागू किये गये हैं । पूर्व में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति के बाद भी आसन्न बाधाओं से निपटने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे । प्रदेश में वर्तमान में विद्युत की आपुर्ति मुख्य रूप से पारम्परिक ईधन पर ही आधारित है। मध्य-प्रदेश शासन व्दारा बढते मौसम परिवर्तन , ग्लोबल वार्मिंग आदि विषयों पर गंभीरता पूर्वक ध्यान दिया गया है । नवकरणीय ऊर्जा संसाधनों का उपयोग ,ऊर्जा संरक्षण व ऊर्जा दक्षता उपकरणों को प्रोत्साहित करना प्रदेश शासन व्दारा इस दिशा में लिया गया बडा कदम है । प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा का उपयोग ऊर्जा संरक्षण के लिए अत्यावश्यक है। अतः इस ग्रीन ऊर्जा आधारित सभी चार नवकरणीय ऊर्जा संसाधनों (सौर , पवन, बायोमास व लघु जल विद्युत ऊर्जा) से विद्युत उत्पादन को बढावा देने के उद्देश्य से नीतियॉ और मध्य प्रदेश ऊर्जा संरक्षण फंड नियम व अन्य मार्गदर्शिका प्रदेश शासन व्दारा लागु की गयीं हैं । नवीन एवम नवकरणीय ऊर्जा विभाग, प्रदेश सरकार का नवकरणीय ऊर्जा से संबंधित सभी विषयों के लिए नोडल विभाग है।जिसका वृहद लक्ष्य नवकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता व ऊर्जा संरक्षण के विकास एवम उपयोग को बढावा देना है जिससे प्रदेश की ऊर्जा मांग में सहयोग हो सके ।